भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान


नागरिक चार्टर


भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान, पुणे की दूरदर्शिता तथा उद्देश्यों का विवरण अनुबन्ध- में संलग्र किया गया है


1) संस्थान द्वारा किए गए व्यावसायिक आदान-प्रदान की जानकारी :


संस्थान का मुख्य कार्य हैं छात्रों को फिल्म निर्माण की कला तथा शिल्प का और दूरदर्शन कर्मियों को संवाकालीन प्रशिक्षण देना संस्थान के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी अनुबन्ध-खख में संलग्र की गई है वर्ष 2009 की विवरणिका की प्रति भी वेबसाइट पर उपलब्ध है


2) ग्राहकों / उपभोक्ताओं के प्रकारों , पुणे जानकारी :


फिल्म और टेलीविजन पाठ्यक्रम के छात्र, दूरदर्शन द्वारा प्रतिनियुक्त टी.वी. प्रशिक्षार्थी और फिल्म तथा टीवी प्रोडक्शन हाऊसों के बाह्य निर्माता संस्थान के मुख्य ग्राहक / उपभोक्ता है


3) ग्राहक / नागरिक से अपेक्षाएँ :


छात्रों एवं दूरदर्शन प्रशिक्षार्थियों की अपेक्षाएँ होती है कि उन्हें फिल्म तथा टीवी माध्यम की कला और शिल्प का सुव्यवस्थित प्रशिक्षण मिले बाहरी निर्माताओं की अपेक्षाएँ सीमित होती हैं, जैसे ठीक समय पर उन के फिल्म और टी.वी. निर्माण के लिए उनके फिल्म तथा टीवी प्रकल्पों के लिए उध गुणवत्ता सम्पन्न उपकरण, प्रशिक्षित तकनीशियन एवं चित्रिकरण योग्य स्थान आदि उचित कीमतों पर उपलब्ध करवाने का प्रावधान सेवाकालीन प्रशिक्षण दूरदर्शन कर्मियों के साथ अन्तर्व्यवहार और विचारों के आदान-प्रदान का सुअवसर प्रदान करता है और जिससे उनके कौशल में वृद्धि होती है तथा नये तकनीकी पहलूओं को दिखाने का अवसर मिलता है


4) हर-एक ग्राहक / उपभोक्ता को दी जानेवाली सेवाओं का अलग-अलग विवरण

( तालिका के रुप में अपेक्षित ) :


संस्थान द्वारा प्रशिक्षित किए गए छात्र एवं दूरदर्शन कर्मियों की संख्या अनुबन्ध -खखख में दर्शाने वाली तालिका संलग्र की गई है


5) कर्मचारियों के सौजन्य और सहयोग से संबंधित सेवा, जिसमें बहुत से कार्य जनता के साथ पारम्परिक सहयोग से निष्पादित होते है, की गुणवत्ता और समय सीमा का उल्लेख करें

एक शैक्षिक संस्थान होने के कारण संस्थान के मुख्य कार्यं है, पदविका पाठ्यक्रमों और टेलीविजन में एकवर्षीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम में प्रवेश लेनेवाले फिल्म तथा टेलीविजन के छात्रों एवं दूरदर्शन और टी.वी. प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण देना विभिन्न प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की पाठ्यचर्या, मीडिया व्यावसायिकों और अध्यापकों को सम्मिलित करके शैक्षिक परिषद द्वारा बनाई जाती है इन पाठ्यक्रमों के लिए निश्चित समयावधि होती है, जो फिल्म, टेलीविजन तथा संबंधित विषयों के महत्वपूर्ण अंगों से संबंधित प्रशिक्षण का प्रवधान किए जाने पर ही की जाती है शासी परिषद द्वारा निर्धारित शैक्षिक अर्हताओं के मानदण्डों तथा अनुभव के आधार पर अध्यापकों को नियुक्त किया जाता है अल्पावधि पाठ्यक्रमों की अवधि 2 सप्ताहों से 8 सप्ताहों तक होती है

संस्थान के दो स्कन्ध है : फिल्म स्कन्ध और टेलीविजन स्कन्ध भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान निम्नलिखित पाठ्यक्रम चलाता है :-


1) निम्नलिखित चार विशेषज्ञता के साथ फिल्म और टेलीविजन में तीन वर्षीय

स्नातकोत्तर पदविका

) निर्देशन

) चलचित्रांकन

) सम्पादन

) ध्वनिमुद्रण और ध्वनि संरचना


2) फिल्म अभिनय में द्वि वर्षीय स्नातकोत्तर पदविका


3) कला निर्देशन और निर्माण संरचना में द्वि वर्षीय स्नातकोत्तर पदविका


4) निम्नलिखित चार विशेषज्ञता के साथ टेलीविजन में एक वर्षीय स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम :

) टीवी निर्देशन

) इलेक्ट्रानिक चलचित्रांकन

) वीडियो सम्पादन

) ध्वनिमुद्रण और टीवी अभियांत्रिकी

5) फीचर फिल्म पटकथा लेखन में एक वर्षीय स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम

6) एनिमेशन और कम्प्यूटर ग्राफिक्स में डेढ वर्षीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम

टीवी स्कन्ध दूरदर्शन के सभी श्रेणियों के सेवाकालीन कर्मचारियों के लिए टेलीविजन पाठ्यक्रमों में टीवी निर्माण तकनीकी प्रचालन, सम्पादन, ध्वनि मुद्रण, कैमेरा, ग्राफिक्स और सेट डिजाइन आदि पाठ्यक्रम संचालित करता है

* दूरदर्शन कर्मिकों के लिए टीवी निर्माण और तकनीकी प्रचालन विषय पर 12 सप्ताहों का पाठ्यक्रम

* अन्य लघु पाठ्यक्रम :-

1) दूरदर्शन कर्मिकों के लिए वृत्तचित्र निर्माण (डॉक्यूमेंट्री प्रोडक्शन) - 6 सप्ताह 2) दूरदर्शन कर्मिकों के लिए वीडियोग्राफी पाठ्यक्रम - 2 सप्ताह

3) दूरदर्शन कर्मिकों के लिए टीवी निर्माण के लिए डिजिटल ग्राफिक्स पाठ्यक्रम - 2 सप्ताह 4) बाह्य व्यक्तियों के लिए नॉन लिनियर सम्पादन पाठ्यक्रम - 3 सप्ताह 5) बाह्य व्यक्तियों के लिए मूलभूत वीडियोग्राफी पाठ्यक्रम - 2 सप्ताह 6) बाह्य व्यक्तियों के लिए वीडियोग्राफी का प्रगत (एडवांस) पाठ्यक्रम - 4 सप्ताह 7) दूरदर्शन कर्मियों के लिए टीवी निर्माण में मल्टीमीडिया के अनुप्रयोग विषय पर अभिविन्यास पाठ्यक्रम - 4 सप्ताह 8) दूरदर्शन कर्मियों के लिए कला निर्देशन (मूलभूत स्तर का) - 3 सप्ताह 9) दूरदर्शन कर्मियों के लिए टीवी निर्माण के लिए ध्वनि संरचना - 2 सप्ताह 10) दूरदर्शन कर्मियों के लिए टीवी तकनॉलाजी - 2 सप्ताह 11) दूरदर्शन कर्मियों के लिए मेक-अप पाठ्यक्रम -2 सप्ताह 12) दूरदर्शन कर्मियों के लिए डीवी केम प्रचालन की जानकारी - 01 सप्ताह 13) दूरदर्शन कर्मियों एवं बाहरी व्यक्तियों के लिए युक्तिपूर्ण टेलीविजन प्रबन्धन- 4 सप्ताह 14) दूरदर्शन कर्मियों एवं बाहरी व्यक्तियों के लिए टीवी अनुसन्धान पद्धति - 2 सप्ताह

15) विश्वविदयालयों की मांग के अनुसार विभिन्न विश्वविदयालयों एवं संस्थानों के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के स्नातकोत्तर छात्रों के लिए की गई कार्यशालाएँ इस प्रकार है :-

) पंजाब यूनीवर्सिटी, पटियाला ) गुरु नानक देव यूनीवर्सिटी, जालन्धर ) इंटरनॅशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एण्ड मीडिया, पुणे ) महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्व विदयालय, वर्धा, महाराष्ट्र

छात्र और प्रशिक्षणार्थी निरन्तर भा.फि.टे.संस्थान के संकाय सदस्यों, निदेशक और शासी निकायों के सम्पर्क में रहते हैं और उन्हें समस्याओं एवं मुद्दों को सुलझाने के लिए सभी प्रकार का सहयोग उपलब्ध करवाया जाता है

6) शिकायत निवारण प्रक्रिया और वहाँ तक पहँुचने की प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी

नीचे दर्शाए गए संबंधित अधिकारियों से नागरिक संपर्क कर सकते हैं मामले के अनुसार जानकारी और आवश्यक सहायता पाने के लिए सूचना और सुविधा काऊंटर (आयएफसी) अथवा निम्नलिखित अधिकारियों में किसी से भी संपर्क किया जा सकता है टी.वी. बिल्डिंग के दूसरे तल पर (कमरा संख्या 330) आयएफसी उपलब्ध है

शिकायत (ग्रीवन्स/कंप्लेंट) यदि कोई हो तो, उसकी पावती तुरंत और उसका उत्तर और 30 दिनों के अंदर (पावती के लिए 7 कार्यदिवस) दिया जायेगा तथा सामान्य जवाब एवं अन्य जवाब लगभग 30-40 कार्यदिवसों के अन्दर दिया जायेगा केन्द्रीय स्तर के मुख्य/नीति/योजनासंबंधी विषयों के लिए नागरिक, निदेशक, भाफिटेसं पुणे को संपर्क/शिकायत कर सकते हैं

से संबंधित विशेष मामलें ।

अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है ।

प्रवेश

सूचना और सुविधा काऊंटर

टेलीफोन नं. 020-25425656

अन्य शिकायतें

कुलसचिव जी का कार्यालय

टेलीफोन नं : (020) 25433360

फॅक्स नं. : (020) 25457638

-मेल : registraroffice@ftiindia.com

सेवोत्तम के अनुपालन के लिए तालिका

क्र.सं

विवरण

जी हॉ

नहीं

1.

क्या अनुभाग ने अनुमोदित नागरिक चार्टर प्रकाशित किया है ?

जी हाँ


2.

क्या विभाग ने सर्विस डिलीवरी यूनिट में चार्टर को परिचालित किया है ?

जी हॉ


3.

क्या विभाग ने विभाग के लिए लोक शिकायत निदेशक/नोडल अधिकारी के रूप में किसी वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया है ?

जी हाँ


4.

क्या विभाग ने मानकों के अनुसार नागरिक चार्टर के सूत्रीकरण,कार्यान्वयन और समीक्षा के लिए, नागरिकों के ग्रुप के प्रतिनिधियों के साथ कोई कार्यदल स्थापित किया है

प्रक्रिया जारी है ।


5.

क्या विभाग ने शिकायत दर्ज करने और निवारण प्रक्रिया तथा निवारण समयोचितता आदि को प्रकाशित किया है ?

जी हाँ


श्री विरेंद्र सैनी, संकायाध्यक्ष (फिल्म) को कर्मचारी शिकायत अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान के कर्मचारियों की समस्याओं की जाँच-पडताल करते हैं

दिए गए आश्वासनों की पूर्ति होने की स्थिति में निदेशक, भाफिटेसं, जो संस्थान की नेमी गतिविधियों को देखते है, से निम्नलिखित पते पर सम्पर्क किया जा सकता है :

श्री डी.जे. नारायण,भासूसे

निदेशक,

भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान, विधि महाविालय मार्ग, पुणे- 411 004 टेलीफोन नं. (020) 25431010 (कार्यालय) (020) 25431047 (आवास) -मेल : director@ftiindia.com


7) किसी बाहरी संस्थान द्वारा अधिकार पत्र के वार्षिक पुनरीक्षण तथा कार्य-निष्पत्ति लेखा परीक्षण के लिए निश्चित रुप से प्रावधान किया जाना चाहिए


सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भेजी जानेवाली वार्षिक रिपोर्ट में संस्थान की शैक्षिक गतिविधियाँ तथा अन्य कार्यक्रमों का विवरण दिया जाता है लेखा नियंत्रक तथा महालेखाकार, भारत सरकार की सिफारिश के अनुसार संस्थान की लेखा परीक्षा की जाती है मुख्य निर्देशक,लेखा, सेन्ट्रल, मुंबई द्वारा भी संस्थान के लेखाओं की वार्षिक जांच की जाती है


8) कौन से स्तर पर इस अधिकार पत्र को अनुमोदित किया गया है : सीटीजन चार्टर की विषय सूची को सीटीजन चार्टर के मूल ग्रुप ( Core Group) द्वारा पारित किया गया है और माननीय मंत्री महोदय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा स्वीकृत किया गया है


9) उपभोक्ताओं द्वारा प्राप्त किए जानेवाले प्रतिपुष्टि/सुझावों को अधिकार पत्र में दर्शाया जाए : भाफिटेसं में, छात्र संघ के माध्यम से छात्रों के साथ निरन्तर संवाद किया जाता है पाठ्यक्रम की समाप्ति के बाद टीवी प्रशिक्षार्थियों से अनुरोध किया जाता है कि वे प्रदान किए गए प्रशिक्षण एवं संस्थान के अन्य पहलुओं के संबंध में अपनी प्रतिपुष्टि रिपोर्ट प्रस्तुत करें तथा यदि कोई सुझाव हो तो दें

.......

अनुलग्रक-



i) दूरदर्शिता और प्रयोजन विवरण (विजन और मिशन स्टेटमेंट) :


फिल्मों और टेलीविजन के अधिकार क्षेत्र में आनेवाली तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करना


फिल्म और टेलीविजन के प्रशिक्षण के लिए भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान, पुणे एक श्रेष्ठ केन्द्र है, भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के क्षेत्र में दिए अपने सहयोग के कारण देश और विदेश, दोनों में इसकी अपनी एक पहचान बनी है

पूर्व प्रभात फिल्म कंपनी के साधन सम्पन्न फिल्म स्टूडियो, पुणे में इसकी स्थापना हुई, आशापूर्ण भविष्य के साथ, इसकी उपयुक्त शुरुवात थी इस संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्रों ने नई-नई संकल्पनाओं तथा तकनीकी में मजबूत नींव के आधार पर शीघ्र ही भारतीय सिनेमा जगत में अपने अस्तित्त्व का एहसास दिलाया हैं जिसके परिणाम स्वरुप सत्तर के दशक में नये भारतीय सिनेमा का उदय हुआ संस्थान के पदविका धारकों ने सुशिक्षित सृजनशील नवयुवकों के रुप में अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ फिल्म निर्माण की विभिन्न शाखाओं में अपनी योग्यता सिद्ध कर दिखाई है आज उनमें से कुछ छात्रों के नाम उनके विशिष्ट क्षेत्र में, सम्मानपूर्व लिए जाते है

इसी प्रकार टीवी स्कन्ध जो 1974 में आरम्भ हुआ था, ने दूरदर्शन के सेवारत कर्मिकों को सेवाकालीन प्रशिक्षण के माध्यम से टेलीविजन के विकास में अपना योगदान दिया 1980 के दशक तक संस्थान को एक अग्रणी संस्थान के रुप में जाना जाने लगा

विभिन्न प्रकार की कलात्मक सुविधाओं सहित इस संस्थान में उधतम संरचनात्मक सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं इस प्रकार की सुविधाएँ और सेट-अप विश्व के बहुत ही कम फिल्म और टेलीविजन स्कूलों में उपलब्ध हैं संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली शिक्षा की गुणता के कारण ही यह सम्भव हुआ है और इसने आदर्श संस्था के रुप में प्रसिद्धि प्राप्त की है



भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान की दूरदर्शिता


किसी भी संस्थान का लक्ष्य उसकी परिभाषा में दृष्टिगोचर होता है जिन लक्ष्यों को सामने रखकर संस्थान की स्थापना हुई, उसके (भाफिटेसं) मेमोरंडम ऑफ एसोसिशन में इस परिभाषा के महत्त्वपूर्ण अंश देखे जा सकते हैं तथापि इस परिभाषा में कई वर्षों की विकास यात्रा और उसके क्रियाकलापों को भलीभाँति उजागर करके संस्थान की पहचान बताना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है

अपने लक्ष्यों के अनुरुप यह संस्थान फिल्म और टेलीविजन प्रशिक्षण देने वाली देश की अग्रणी संस्था के रुप में उभर कर फिल्म और टेलीविजन जगत की दिन प्रतिदिन बढती हुई मांग को पूरा करने हेतु प्रशिक्षित कर्मि उपलब्ध करा रही है इतनी महत्त्वपूर्ण सफलता प्राप्त करने के बावजूद संस्थान अप्रिय और लम्बे समय से चली रही समस्याओं से जूझ रहा है जिसके फलस्वरुप अपने वांछित लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधाओं के साथ-साथ कई बार अशांति का वातावरण भी बन जाता है

इन बाधाओं के रहते हुए भी संस्थान अपने दीर्घकालीन अनुभव के बल पर अपनी सीमित साधन सम्पत्ति और संरचनात्मक (ढांचा गत) सुविधाओं में निरन्तर वृद्धि कर रहा है अब समय गया है कि इन तकनीक के बल पर उसकी मूलगामी प्रवृत्ति,उद्देश्य, संचालन मानदण्ड जैसे मार्ग अपनाकर आंशिक परिवर्तन, परिवर्धन और संशोधन के साथ उसकी पुनः परिभाषा की जाए

वैश्विक स्तर पर फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भारत ने अपना नाम ऊँचा किया है और मनोरंजन व्यवसाय में विश्वव्यापी प्रतिस्पर्धा में उतरने का निश्चय किया है, विशेष रुप से टेलीविजन माध्यम को सशक्त बनाने की ओर सारे प्रयास किए जा रहे हैं प्रगति के सूर और गति के अनुरुप भा.फि.टे.संस्थान जैसी राष्ट्रीय स्तर की संस्था को विश्व व्यापी प्रतिस्पर्धात्मक फिल्म प्रशिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कोटि लानी होगी, जो विश्व स्तर पर उन्नत प्रौोगिकी और प्रशिक्षण की बेहतर पद्धति प्रयोग में लाने का सामर्थ्य रखती है इसे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विश्व व्यापी स्तर पर तीव्र प्रतिस्पर्धा के मानदण्ड के अनुरुप कार्यकलाप और कार्य कुशलता में वृद्धि और नई तकनीक का प्रयोग करते हुए संस्थान को अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ घनिष्ठता स्थापित करनी होगी अध्यापन कर्मचारी और संस्थान में छात्रों का आदान-प्रदान जैसे विषयों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए

नियमित और चिरस्थायी अन्तर्राष्ट्रीय संबंध बढाना भी संस्थान के हित में है इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संपर्क माध्यम जैसे उत्सव, अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला तथा सेमिनार आयोजित करने की आवश्यकता है भारतीय फिल्म निर्माण जगत के साथ सम्बन्धो में घनिष्ठता लाने हेतु अर्थपूर्ण विचार-विमर्श को बढावा दिया जाए, जिससे संस्थान और फिल्म जगत के बीच रिश्ता दृढ होगा गत कुछ समय में फिल्म जगत और संस्थान के बीच सहयोग के परिणाम स्वरुप संस्थान में पटकथा लेखन और फिल्म अभिनय के नये पाठ्यक्रम आरम्भ किए जा चुके हैं फिल्म उोग में प्रशिक्षित अभिनेता और पटकथा लेखकों की कमी इन पाठ्यक्रमों के आयोजन से पूरी की जा रही है इस दिशा में उोग क्षेत्र की मांग को प्रतिसाद देकर एनिमेशन और कम्प्यूटर ग्राफिक पाठ्यक्रम आरम्भ करना भी प्रस्तावित है

राष्ट्रीय संदर्भ में विचार करने पर हाल ही के दिनों में टेलीविजन के क्षेत्र में जो अद्भूत क्रान्ति आयी है, उसे देखते हुए पाठ्यचर्या और पाठ्यक्रमों में संरचनात्मक बदलाव लाने से संस्थान को महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी है इस दिशा में टेलीविजन शाखा नये पाठ्यक्रम आरम्भ करने हेतु कुछ प्रस्ताव और सुझावों का मसौदा शीघ्र ही प्रस्तुत करने वाली है

संस्थान के पास उपलब्ध साधन सुविधाओं के परिप्रेक्ष्य में इस समय यह महसूस किया जा रहा है कि अभी कुछ क्षेत्रों में ध्यान केन्द्रित करना अति आवश्यक है यपि योजनागत व्यय द्वारा संस्थान ने काफी प्रगति करके दिखाई है, किन्तु प्लान निधि की वर्तमान अवस्था में बहुत सी त्रुटियाँ विमान हैं फिल्म चलचित्रांकन, फिल्म सम्पादन विभाग, टेलीविजन स्कन्ध और कुछ भवन एवं अध्ययन कक्षों में सुधार लाने हेतु धन की तत्काल आवश्यकता है यही कारण है कि हम शासी परिषद के अनुमोदन से चालू वर्ष में योजना और गैर योजना अनुदान में बढोतरी करने के लिए सरकार से अनुरोध कर रहे हैं हमारी मूल योजनागत और गैर योजनागत निधि में की गई भारी कटौती के कारण, अतिरिक्त निधि की मांग करना सर्वथा उचित है यदि हमारी जरुरतें पूरी नहीं हुई तो अपेक्षित ढांचागत सुविधाओं के अभाव में अध्यापन और प्रशिक्षण प्रक्रिया में रुकावटें आएगी


दूसरी चिंता की बात यह है कि संस्थान में अतिरिक्त अध्यापन कर्मी तथा कर्मचारी वर्ग की आवश्यकता है पिछले कुछ समय से अध्यापन कर्मचारियों के अनेक पद रिक्त हैं जिस के कारण विमान अध्यापकों पर कार्य का अतिरिक्त दबाव रहा है संस्थान की गतिविधियाँ सुचारु ढंग से हो इसलिए विशेष रुप से उधतर वेतनमान में अध्यापकों को नियुक्त करने की समस्या को सुलझाया जाना चाहिए अध्यापकों को मानदेय के आधार पर नियुक्त करना तथा अन्य कर्मियों की नियुक्ति और जरुरत पडने पर बाहरी अध्यापकों की सेवाएँ लेने के नियमों में शिथिलता या लचीलापन होना अपेक्षित है सेवा शर्तों में संशोधन करने की भी अपेक्षा है-जैसे कर्मियों के मन में उपजी उदासीनता टालने हेतु विमान अध्यापकों के वेतनमान तथा पदोन्नतियाँ, निरन्तर गतिशील परिस्थितियों का सामना करने लिए वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति करने हेतु संस्थान के भर्ती नियमों तथा सेवा उप नियमों का पुनरीक्षण करना भी जरुरी है

राष्ट्रीय संस्था होने के कारण, फिल्म और टेलीविजन माध्यम से सार्वजनिक निधि प्राप्त उध शिक्षा प्रदान करने की भूमिका निभाने से संस्थान पीछे नहीं हट सकता यदि ऐसा होता है तो भिन्न भिन्न श्रेणी की जनसंख्या धन के अभाव के कारण महत्त्वपूर्ण शिक्षाप्राप्त करने से वंचित रह जाएगी इस महत्त्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी का भलीभांति निर्वहन हो सके, इसलिए संस्थान को चाहिए कि वह अपने व्यापक कार्य क्षेत्र के दायरे में संस्थान को पूर्ण रुप से अपने स्वयं के संसाधनों पर निर्भर रहते हुए अपनी गतिविधियों में वृद्धि करें और निरन्तर अन्वेषी कार्यों में प्रयासशील रहे सार्वजनिक संस्थान होने के नाते अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए संस्थान प्रतिस्पर्धा में रहने की योग्यता रखेगा और बाजार में उपलब्ध अवसरों से इष्टतम लाभ उठाने में वह सक्षम बनेगा हमारी बजट और पुस्तपालन (एकाउटिंग सिस्टम) प्रणाली का हमें इस प्रकार गठन करना होगा, जिससे कि सभी आत्म निर्भर पाठ्यक्रम, सार्वजनिक निधि प्राप्त पाठ्यक्रमों से अलग रखे जाए इस कारण इन पाठ्यक्रमों के गठन और संचालन में लचीलापन लाने की दिशा में सुलभता होगी

अब समय गया है कि संस्थान के लिए निधि की उपलब्धि की प्रक्रिया का पुनरीक्षण भी किया

जाए कुछ योजनागत विकास कार्य और स्थापना व्यय का बोझ उठाने में उसे सक्षम बनाते समय कुछ अचानक प्रकट होने वाली परिस्थितियों में सरकारी निधि उपलब्धि नियमों में उल्लेखित शर्तों के कारण सकारात्मक प्रतिसाद देने में बाधा आती है ऐसी कठिनाईयों का सामना करने के लिए Corpus Fund बनाने की आवश्यकता महसूस की गई है और इस संबंध में सरकार का अनुमोदन हेतु प्रस्ताव भेजा गया है Corpus Fund के अलावा, विशेष रुप से हमारे पास जो भूमि संसाधन उपलब्ध है, उससे यदि हम लाभ उठाना चाहते हैं तो अन्तर्राष्ट्रीय संगठन एवं कार्पोरेट निकायों से निधि लेने के अन्य विकल्पों को संस्थान को खोजना चाहिए यहाँ तक कि मुख्य उेीर्ीिी के लिए हमारे बिल्डिंग मास्टर प्लान को प्रचालित करने हेतु हमें पर्याप्त मात्रा में निधि की जरुर पडेगी मुख्य थिएटर और क्लास रुम तथा स्टूडियो का पुनर्निर्माण बहुत जरुरी है यदि हमें उध स्तरीय ग्राहक समुदाय को आकृष्ट करना चाहते हैं तो हमें सुविधाओं को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के अनुरुप उन्नत बनाना होगा

इन सब परिस्थितियों में हमें अपना ध्यान उस महत्त्वपूर्ण बिन्दु की ओर केन्द्रित करना चाहिए जिसे किसी संस्था का प्राण कहा जा सकता है और वह है उसके चिर स्थायी नीति मूल्य एवं दृढ सिद्धान्त, जिनके आधार पर संस्थान प्रगति पथ पर अग्रसर रहते हुए अपने आप को परिवर्तित समय के अनुरुप ढालता है व्यवसाय के मानदण्ड एवं मानकों के अनुसार नई प्रौोगिकी का प्रयोग एक महत्त्वपूर्ण अंग है तो दूसरी ओर ऐसा भी देखा जाता है कि निरन्तर सतर्कता के अभाव में अप्रिय वातावरण तथा शैक्षिक सत्रों में अवांछित विलम्ब हो जाता है जो कि अच्छा संकेत नहीं

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हमें अपनी छवि और पहचान के प्रश्न की पुनः समीक्षा करनी होगी हम शायद ऐसे मुकाम पर पहुँच गए हैं जहाँ अपनी प्रतिमा उज्ज्वल बनाने हेतु संस्थान को आधुनिक तकनीक द्वारा सामने रखे गए लक्ष्यों के अनुरुप सफलता की चोटी पर पहुँचने के लिए अथक प्रयास करने की आवश्यकता है

* * * * *



अनुबन्ध-II

उद्देश्य


संस्थान की स्थापना जिन उद्देश्यों के लिए हुई है वे निम्नानुसार है :-


1. स्नातकपूर्व और स्नातकोत्तर, दोनों ही स्तरों पर फिल्म और टेलीविजन की सभी शाखाओं

के शिक्षण की उपयुक्त पध्दति (पॅटर्न) को इस प्रकार विकसित करना, जिससे भारत में फिल्म और टेलीविजन शिक्षा के उध मानक स्थापित हो सके


2. भारतीय फिल्मों और टेलीविजन कार्यक्रम के तकनीकी मानकों को इस प्रकार उन्नत करने का निरन्तर प्रयास करना, जिससे वे सौन्दर्यपरकता की दृष्टि से अधिक संतोषजनक और स्वीकार्य हो


3. सिनेमा और टेलीविजन क्षेत्र में नये विचारों और तकनीकियों के निरन्तर अन्तर्प्रवाह और इन विचारों और तकनीकियों को आत्मसात, करके प्रशिक्षित कर्मियों को बाहर जाना


4. भारत में फिल्म दयो और संगठनों की बढती हुई आवश्यकताओं के लिए और विशेषतः टेलीविजन कर्मिकों के लिए सेवा के दौरान प्रशिक्षण कार्यक्रम गठित करने के लिए प्रशिक्षित व्यक्तियों को तैयार करना


5. फिल्म और टेलीविजन के क्षेत्र में भावी कर्मचारियों में केवल मनोरंजन के अपितु शिक्षा और कलात्मक अभिव्यक्ति के साधन के रुप में उनके माध्यम की क्षमता के विषय में नई जागरुकता उत्पन्न करना


6. पूर्व संस्थान तथा टेलीविजन केन्द्र के प्रशासन और प्रबन्ध को ग्रहण करना और चलाना


7. फिल्म, टेलीविजन और अभिनय कलाओं के क्षेत्र में अन्य राष्ट्रीय और / या विदेशी संस्थानों और संस्थाओं तथा संगठनों को सहयोग देना


8. सिनेमा और टेलीविजन के लिए फिल्में बनाने की कला और शिक्षा में तथा सम्बद्ध विषयों में स्नातकोत्तर पूर्व और स्नातकोत्तर शिक्षण की व्यवस्था करना


9. फिल्म और टेलीविजन की विभिन्न शाखाओं में अनुसंधान के लिए सुविधाएँ प्रदान करना तथा अनुसंधान कराना


10. स्नातक पूर्व और स्नातकोत्तर अध्ययनों के लिए पाठ्यक्रम और पाठ्य विषयों को निर्धारित करना


11. यथासम्भव परीक्षाएँ आयोजित करना तथा डिप्लोमा, प्रमाणपत्र और शैक्षिक उपाधियाँ / सम्मान प्रदान करना


12. पुनश्चर्या पाठ्यक्रम, ग्रीष्मकालीन स्कूलों आदि को संगठित करना तथा देश के अंदर और विदेशों से अनुसंधान विद्वानों और विशेषज्ञों को व्याख्यान देने और अनुसंधान के विकास हेतु आमंत्रित करना तथा उन्हें समुचित पारिश्रमिक का भुगतान करना


13. संस्थान के छात्रों, स्टाफ के सदस्यों को संगोष्ठियों, सम्मेलनों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों और इसी प्रकार के अन्य कार्यों के लिए, भारत में और विदेशों में, अध्येयता वृत्ति, छात्रवृत्ति आदि के माध्यम से अन्यथा प्रतिनियुक्ति करना


14. किसी ऐसी पत्रिकाओं, नियतकालिकों, विनिबन्ध (मोनोग्राफ) पोस्टर अथवा फिल्म को मुद्रित करना, जो संस्थान के उद्देश्यों को बढावा देने के लिए वांछनीय है


15. संस्थान के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सरकारी और गैर सरकारी तथा अन्य शैक्षिक निकायों के कार्यों में सहायता तथा सहयोग देना


16. फिल्म और टेलीविजन के क्षेत्र में अध्ययन तथा अनुसंधान में रुचि बढाने की दृष्टि से

छात्रवृत्तियाँ, अध्येयता वृत्तियों, आर्थिक सहायता और पारितोषिक/पुरस्कार की स्थापना करना तथा प्रदान करना


17. नियमों और उपविधियों के अनुसार प्रोफेसर पदो., रीडर पदों, प्राध्यापक पदों तथा किसी निर्धारित अन्य पदों का सृजन करना और उन पदों पर नियुक्ति करना


18. संस्थान के विद्वानों, अधिकारियों, स्टाफ-सदस्यों तथा छात्रों के निवास के लिए छात्र निवास और छात्रावासों को स्थापित करना तथा उनके संबंध में फीस और अन्य प्रभार नियत तथा वसूल करना


19. संस्थान के प्रयोजन के लिए किसी सरकार, निगम, न्यास या व्यक्ति से कोई अनुदान,अंशदान, चंदा, भेंट वस्तुएँ, दान, वसीयत और चल तथा अचल सम्पत्तियों का अन्तरण

स्वीकार करना, परन्तु यह तब, जब उसके साथ ऐसी कोई शर्त या बाध्यताएँ हो, जो संस्थान के उद्देश्यों के विरुध्द हो विदेशी सरकारों, विदेशी संगठनों या अन्तर्राष्ट्रीय

संगठनों से कोई अनुदान या दान प्राप्त करने के मामले में केन्द्रीय सरकार का पूर्व अनुमोदन लेना आवश्यक है ।


20. एक निधि बनाए रखना जिसमें निम्नलिखित राशि जमा की जाएगी :


) केन्द्र सरकार द्वारा दिया गया सभी धन,

) संस्थान को प्राप्त सभी फीसें और अन्य प्रभार

) अनुदान भेंट वस्तु, दान, वसीयत अथवा अन्तरण द्वारा संस्थान का प्राप्त सभी धन और

) किसी भी अन्य रीति से अथवा किसी भी अन्य स्त्रोत से संस्थान को प्राप्त सभी धन।


21. निधि में जमा किए गए समस्त धन को ऐसे बँकों में जमा कराना या ऐसी रीति से उसे लगाना (विनिधान करना) जो संस्थान के निर्णय के अनुसार करना


22. चैक, नोट या अन्य समझौता वार्ता की लिखत लिखना, तैयार करना, स्वीकार करना और पृष्ठांकित करना और उन पर बट्टा देना (डिस्काउंट चैक) और इस प्रयोजन के लिए ऐसे हस्तान्तरण पत्रों और विलेखों पर हस्ताक्षर करना, उन्हें निष्पादित करना तथा उन्हें सौंपना,

जो संस्थान के उद्देश्यों के लिए आवश्यक हो


23. संस्थान की निधियों या उनके किसी विशिष्ट भाग से उन व्ययों को देना जिसे संस्थान ने समय-समय पर अपने कार्यकलाप के प्रबन्ध और प्रशासन के लिए उपयोग में लाया हो इसके अन्तर्गत संस्थान की संरचना के आकस्मिक सभी व्यय, समस्त किरायें, दरें, कर, निर्गम और कर्मचारियों के वेतन भी है


24. संस्थान के शिक्षकों, स्टाफ के सदस्यों और अन्य कर्मचारियों या पूर्व कर्मचारियों को अथवा उनकी पत्नियों, विधवाओं, बधों, अथवा अन्य आश्रित व्यक्तियों को पेन्शन ग्रॅच्युइटीज्या पूर्व सहायता देना


25. संस्थान द्वारा नियोजित किसी व्यक्ति के बीमें के लिए भुगतान करना और उसके लिए या उसकी पत्नी, विधवा, बधों या अन्य आश्रित व्यक्तियों के लिए भविष्यनिधि और सुविधा निधि की स्थापना करना और उसमें अंशदान करना


26. संस्थान के प्रयोजनों के लिए किसी रीति से सम्पत्ति अर्जित करना, धारण करना, या बेचना, परन्तु किसी अचल सम्पत्ति के बेचने के मामले में केन्द्रीय सरकार का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है


27. संस्थान की किसी सम्पत्ति का ऐसे ढंग से प्रयोग करना, जिसे संस्थान के उद्देश्यों को अग्रसर करने हेतु उचित समझा जाए


28. संस्थान के उद्देश्यों के लिए केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से प्रतिभूति जमा सहित या उसके बीमा अथवा किसी बन्धक, या भार या गिरवी रखने अथवा अमानत के रुप में अथवा अन्य कोई रीति में धन उधार देना और जुटाना


29. संस्थान के किसी ऐसे धन का निवेश (इनवेस्ट) करना और उसी के लिए व्यवहार में लाना, जिसकी संस्थान के किसी उद्देश्य के लिए तुरन्त आवश्यकता नहीं है, ऐसा निवेश या व्यवहार ऐसे ढंग से किया जाए, जो संस्थान संविधान के द्वारा उपबन्धित है या जो समय-समय पर निर्धारित की जाए


30. संस्थान के उद्देश्यों के सम्बन्ध में मकानों, छात्रावासों, स्कूलों अथवा अन्य इमारतों जिनके अन्तर्गत विमान भवन भी है उसका निर्माण, अतिरिक्त बढना तथा उसमें परिवर्तन, उसमें विस्तार करना, सुधार करना, मरम्मत करना, बढाना या परिवर्तन करना और उनमें प्रकाश, जल, नालियों, फर्निचर, फिटिंग, उपकरणों, साधित्रों और उपकरणों की व्यवस्था करना और उनसे उन्हें सज्जित करना, जिससे उनका प्रयोग, ऐसे भवन के रुप में किया जाए, जिसका संबंध संस्थान के उद्देश्यों से संबंधित है


31. संस्थान की अथवा उसके द्वारा धारित किसी भूमि पर मनोरंजनप्रद अथवा खेल का मैदान, पार्क या किसी स्थावर सम्पत्ति की संरचना करना या उसे अर्जित करना, विन्यास करना, मरम्मत करना, विस्तारित करना, परिवर्तित करना और सुधार करना


32. संस्थान के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जैसा भी उचित लगे समितियों या उप समितियों का गठन करना


33. संस्थान के कार्यकलापों के संचालन के लिए नियम और विनियम बनाना तथा समय-समय पर उनमें जोडना, संशोधन, परिवर्तन और रद्द करना और


34. ऐसे सभी विधिपूर्ण कार्य और अन्य बातें, चाहे पूर्वोक्त अधिकारों के आनुषंगिक हो या नहीं, जो अनुसन्धान और प्रशिक्षण केन्द्र के रुप में संस्थान के सभी या किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक और लाभकारी है



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अनुबन्ध-III

प्रशिक्षित किए गए कर्मिकों की संख्या

. फिल्म स्कन्ध


क्र.संख्या

पाठ्यक्रम

प्रशिक्षणार्थियों की संख्या

1.

निर्देशन में प्रगत पदविका

निर्देशन में पूर्वोत्तर पदविका


80

2.

फिल्म निर्देशन

217

3.

पटकथा लेखन सह-निर्देशन के पहलू

110

4.

पटकथा लेखन

23

5.

चलचित्रांकन

316

6.

ध्वनि मुद्रण और ध्वनि अभियांत्रिकी/ श्रव्यांकन

253

7.

फिल्म सम्पादन

283

8.

फिल्म अभिनय

221

9.

निर्माण प्रबन्धन (फिल्म और टेलीविजन)

06

10.

कला निर्देशन (फिल्म और टेलीविजन)

32

11.

एनिमेशन तथा कम्प्यूटर ग्राफिक्स

24

कुल

1565


. टेलीविजन स्कन्ध


क्र.संख्या

पाठ्यक्रम

प्रशिक्षणार्थियों की संख्या

1.

दूरदर्शन कर्मचारी (मूलभूत/दीर्घावधि/लघु अवधि)


मूलभूत पाठ्यक्रम

3315

दीर्घावधि

43

1971 से लघु अवधि

628

2.

फिल्म प्रभाग कर्मचारी

19

3.

आयआयएमसी, नई दिल्ली के भारतीय सूचना सेवा परीवीक्षार्थी

164

4.

भाफिटेसं. के फिल्म छात्र

711

5.

एक वर्षीय स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम

182

6.

अन्य/पुनश्चर्या पाठ्यक्रम/सत्यजित रे फिटेसं/ एनएसडी/मुक्त विापीठ/राज्य सरकार/अन्य संगठन/अन्य देशों (एआयबीडी/मालव्दिप आदि)

836


कुल

5998



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